Farrukhabad: भारी संख्या में मौजूद रहे श्रद्धालु, अनूप महाराज ने कहा,
फर्रुखाबाद (Farrukhabad) जिले के ग्राम भुवनपुर (Bhuvanpur) में प्रारंभ हुई श्रीमद्भागवत कथा (Shrimad Bhagwat Katha) में प्रातः काल की बेला में कथा पांडाल (Katha Pandal) में बड़े धूमधाम से गांजे बाजे के साथ भुवनपुर ताजपुर तौफिक नगला होते हुए पतित पावनी मां गंगा से कलश भरकर कथा पांडाल में घट स्थापित कर मध्याह्न कालीन बेला में असलापुर धाम (Aslapur Dham) से पधारें सुप्रसिद्ध कथावाचक परम पूज्य अनूप ठाकुर महाराज (Anoop Thakur Maharaj) ने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराणों का मुकुट मणि हैं। इसमें साक्षात श्रीकृष्ण (Shree Krishna) विराजमान हैं। जहां कहीं भी श्रीमद्भागवत कथा का अनुष्ठान होता है, वह स्थान एक तीर्थ बन जाता है। जहां देवी देवता भी अप्रत्यक्ष रूप से कथा श्रवण करने आते हैं। इसलिए जहां कहीं भी श्रीमद्भागवत कथा का अनुष्ठान हो वहां भागवत श्रवणार्थ अवश्य जाना चाहिए!
इसी के साथ कथावाचक अनूप ठाकुर महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा नाम महिमा और भक्ति ज्ञान वैराग्य की कथा के साथ साथ आत्म देव, धुंधली और धुंधकारी की कथा को विस्तार से सुनाया। उन्होंने बताया कि आत्मदेव जो कि एक वेद पाठी ब्राह्मण थे और बड़े ही विद्वान थे, लेकिन उनके यहां कोई पुत्र नहीं था। वह ग्लानि से भरे हुए एक दिन जंगल में जा पहुंचे। वहां उन्हें एक साधु के दर्शन हुए। साधु ने उन्हें एक फल दिया। आत्मदेव की पत्नी धुंधली ने वह फल अपनी गाय को खिला दिया। कुछ समय बाद गाय ने एक बच्चे को जन्म दिया। उसका पूरा शरीर मनुष्य का था, केवल कान गाय के थे। जिसका नाम गोकर्ण (Gokarna) रखा गया। एक धुंधली का पुत्र जो कि उसकी बहन का था, उसका नाम धुंधकारी रखा गया।
अनूप ठाकुर महाराज ने बताया कि साधु के आशीर्वाद से जो पुत्र हुआ वह ज्ञानी और धर्मात्मा हुआ और धुंधकारी दुराचारी, व्यभिचारी निकला। व्यसन में पड़कर चोरी करने लगा। एक दिन लोभ में आकर उसकी हत्या हो गई। बाद में यह प्रेत बना, जिसकी मुक्ति के लिए गोकर्ण महाराज जी ने भागवत कथा का आयोजन किया। भागवत कथा सुनकर धुंधकारी को मोक्ष की प्राप्ति और प्रेत योनि से मुक्ति मिली। कथा श्रवणार्थ आयोजक डा. पंचम सिंह प्रधान, परिक्षित धनपाल सिंह सप्तनीक फतेह सिंह, विनोद सिंह आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
अखिलेश बाथम
Sandhya Halchal News