Hardoi: शिक्षा का मंदिर बना जंग का मैदान, BEO के कार्यशैली पर उठे सवाल
हरदोई (Hardoi) ज़िले में शिक्षा के मंदिरों मे शिक्षकों के बीच आये दिन होने वाले मनमानी पूर्ण रवैया रोज़ ही अख़बारों की सुर्खियां बनते दिखाई दे रहे है। इस तरह के विवाद व तानाशाही रवैया नौनिहालों के भविष्य की नीव कमजोर कर रहे है, और शिक्षा के मंदिर भी कलंकित हो रहे है। ऐसे में विद्यालय में होने वाले विवादों पर अंकुश लगाने व शिक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित रखने के लिये विकास खण्ड स्तर से लेकर ज़िला स्तर तक शासन द्वारा एक भारी भरकम अधिकारियों की फौज लगा रखी है। इतनी लम्बी अधिकारियों की फौज के बीच विद्यालयों का सही से संचालन न हो पाना अपने आप मे एक यक्ष प्रश्न बन जाता है।
आपको बता दें कि, ऐसा ही एक मामला विकास खण्ड कोथावां के संविलियन विद्यालय अटिया मझिगवां का है. जहां पर एक दबंग सहायक अध्यापक सत्येंद्र सिंह द्वारा बच्चों की पढ़ाई में रूचि न लेकर विद्यालय से गायब रहने का अपना शुगल बना लिया हैं। महीने मे कभी कभार स्कूल आकर पूरी हाजिरी लगाकर ड्यूटी करने वाले शिक्षक को जब प्रभारी इंचार्ज शिवमूर्ति त्रिपाठी ने टोक दिया तो इस दबंग शिक्षक ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुये गाली गलौज किया, जिसे विद्यालय मे अध्ययन कर रहे छात्रों ने भी सुना। विद्यालय मे कार्यरत शिक्षामित्रों वा अन्य सहायक अध्यापकों ने भी घटना की तस्दीक की। विद्यालय इंचार्ज ने लिखित शिकायत बीईओ (BEO) अजय प्रताप सिंह को दी। जिस पर बीईओ ने स्कूल मे जाकर जांच भी की। लेकिन जांच करने के बाद घटना सत्य होने पर भी दंबंग शिक्षक पर कार्यवाही न होना बीईओ की कार्यशैली पूरी तरह से सवालों के घेरे मे आ गयी है। आखिर खण्ड शिक्षाधिकारी उक्त शिक्षक पर कार्यवाही क्यो नही कर पा रहे है। उन्हे कार्यवाही से कौन रोक रहा है। क्या बीईओ के पद पर रहते हुये इस विवाद का निपटारा करना उनका दायित्व नही है। ऐसे मे बीईओ के ढुलमुल रवैये को लेकर इस प्रकार के सवाल उठने लाजिमी है कि, क्या बीईओ इस शिक्षक को बचाने की जुगत मे लगे है, क्या मामले मे लक्ष्मी जी की दया से शिक्षक अपनी कुर्सी पर काबिज़ है। उपरोक्त मामले पर गवाही देते हुए उक्त प्राथमिक विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं ने भी अपनी बात कही, उनके अनुसार आये दिन विद्यालय में दोनों अध्यापकों के बीच वाद विवाद होता रहता है जिससे नौनिहालों की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है।
अखिलेश बाथम
Sandhya Halchal News