FIFA ने भारतीय फुटबॉल महासंघ को किया निलंबित: हस्तक्षेप पर लिया ये फ़ैसला
विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संचालन संस्था फीफा (FIFA) ने अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) को मंगलवार को निलंबित कर दिया। यह पिछले 85 साल के इतिहास में पहली बार हुआ है फीफा ने कड़े शब्दों में कहा है कि, निलंबन तुरंत प्रभाव से लागू होगा।
इसके बाद भारत को 11 से 30 अक्टूबर को होने वाले अंडर-17 महिला विश्व कप के मेजबानी करने थी लेकिन होने वाले फीफा टूनामेंट की मेजबनी करने का अधिकार भी छीन लिया है।
फीफा ने अपने एक बयान में कहा है, "फीफा परिषद के ब्यूरो ने सर्वसम्मति से अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को तीसरे पक्ष के अनुचित प्रभाव के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का फैसला किया है. तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप फीफा के नियमों का गंभीर उल्लंघन है"
बयान में आगे फीफा ने कहा कि ‘‘निलंबन तभी हटेगा जब एआईएफएफ कार्यकारी समिति की जगह प्रशासकों की समिति के गठन का फैसला वापिस लिया जायेगा और एआईएफएफ प्रशासन को महासंघ के रोजमर्रा के काम का पूरा नियंत्रण दिया जायेगा.’’
आपकी जानकारी के लिए बता दे की इस विवाद की शुरुआत एआईएफएफ के पूर्व अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल के उस फैसले से होती है, जिसमें वह सुप्रीम कोर्ट के एक पेंडिंग ऑर्डर का उल्लेख करते हुए दिसंबर, 2020 में अपना तीसरा कार्यकाल खत्म होने के बाद भी अपने पद से नहीं हटते हैं. साल 2017 से पेंडिंग पड़े इस मामले के तहत उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नए संविधान के मुद्दे का निपटारा होने तक चुनाव कराने से इनकार करते हुए अपना कार्यकाल बढ़ाया था.
नियमों के अनुसार, स्पोर्ट्स कोड के तहत किसी नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन चीफ का अधिकतम कार्यकाल 12 साल हो सकता है। राज्य संघों के कई पदाधिकारी, मोहन बगान के गोलकीपर और मौजूदा भाजपा नेता कल्याण चौबे ने कोर्ट में जाकर हस्तक्षेप करने की मांग की।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2020 से चुनाव नहीं करवाने के कारण 18 मई को प्रफुल्ल पटेल को एआईएफएफ के अध्यक्ष पद से हटा दिया था और यह पद अभी खाली पड़ा है। वहीं, एआईएफएफ के संचालन के लिए सुप्रीम कोर्ट के फॉर्मर जज एआर दवे की अध्यक्षता में तीन सदस्य प्रशासकों की समिति (सीओए) का गठन किया था।
सीओए को राष्ट्रीय खेल संहिता और दिशा निर्देशों के अनुसार एआईएफएफ के संविधान को तैयार करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।
हालांकि, फीफा कानून के अनुसार, सदस्य संघों को अपने-अपने देशों में कानूनी और राजनीतिक हस्तक्षेप के अधीन नहीं होना चाहिए।
मोहम्मद शारिक सिद्दीकी
Sandhya Halchal News