लखनऊ विश्वविद्यालय ने कर्मयोगी छात्रों को प्रमाण पत्र बांटे

लखनऊ विश्वविद्यालय ने कर्मयोगी छात्रों को प्रमाण पत्र बांटे

लखनऊ। सांध्य हलचल ब्यूरो

लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने ‘कर्मयोगी योजना’ के तहत छात्रों के पहले बैच को शुक्रवार को द्वारा प्रमाणपत्र वितरित किए गए. छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली योजना 'सीखने के दौरान आय अर्जन' की पहल के तहत 30 छात्रों को 15,000 रुपये प्राप्त हुए. यह योजना  प्रो.राय द्वारा विश्वविद्यालय में एनईपी 2020 के खंड 14.4.2 को लागू करने के लिए एक अभियान है.

प्रो.पूनम टंडन, अधिष्ठाता, छात्र कल्याण ने विश्वविद्यालय में समानता और समावेश को बढ़ावा देने के इरादे से इस योजना का खाका तैयार किया है. प्रो टंडन ने बताया कि 'कर्मयोगी योजना' छात्रों को अपने कौशल को विकसित करने और आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगी.

इस अवसर पर प्रो. राय ने ‘कर्मयोगी योजना’ के प्रथम बैच के सफल क्रियान्वयन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने छात्रों को स्वयं अर्जित धन का  आनंद लेने की सलाह दी, जो उनके सपने को पूरा करने की शक्ति देता है. उन्होने कहा यह अपने आप में एक मील का पत्थर है क्योंकि ‘कर्मयोगी योजना’ के पहले चक्र का पूरा होना इस छात्र केंद्रित इस नूतन अवधारणा के सफल क्रियान्वयन को दर्शाता है. इस योजना में छात्रों का चयन उनके  आवेदन के आधार पर किया गया इसमें यूजी, पीजी और पीएचडी के विभिन्न छात्र-छात्राएं शामिल थे.

छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य और नवीन परिसर के भीतर विभागों और कार्यालयों में विभिन्न कार्य किए. सभी कार्य पुस्तकालय, कंप्यूटर, प्रयोगशाला से संबंधित थे. छात्रों ने 50 दिनों की अवधि के दौरान प्रतिदिन दो घंटे काम किया. इससे छात्रों को कार्यस्थल का अनुभव प्राप्त हुआ. इस तरह की गतिविधियां विश्वविद्यालय में छात्रों की भागीदारी को सुनिश्चित करती हैं और साथ ही कार्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का निर्माण करती हैं.

कार्य जनित अनुभव के साथ साथ पहली कमाई मिलने पर छात्र-छात्राओं में काफी उत्साह दिखा. छात्रों के समग्र विकास के उद्देश्य से शुरू की गई इस नई छात्र-केंद्रित पहल पर छात्र छात्राएं काफी उत्साहित दिखे. इस अवसर पर मुख्य कुलनुशासक प्रो.राकेश द्विवेदी ,  कुलसचिव डा. विनोद सिंह , परीक्षा नियंत्रक विद्यानंद त्रिपाठी,  तथा पाँचों अतिरिक्त अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. विनीता कचर, प्रो. अमृतंशु शुक्ला, प्रो. संगीता साहू, प्रो. राघवेंद्र प्रताप सिंह तथा डा. अलका मिश्र उपस्थित रहे.