नीट पीजी काउंसलिंग में ईडब्ल्यूएस और ओबीसी का आरक्षण बरकरार: सुप्रीम कोर्ट का फैसला

नीट पीजी काउंसलिंग में ईडब्ल्यूएस और ओबीसी का आरक्षण बरकरार: सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने नीट पीजी ओबीसी और ईडब्ल्यूएस मामले में अपना फैसला सुनिश्चित कर दिया है. स्नातकोत्तर मेडिकल एडमिशन में ईडब्ल्यूएस और ओबीसी के आरक्षण को बरकरार रखा है।

आपको बता दे की जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एएस बोपन्ना की पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत का कहना है कि उसने ओबीसी की वैधता बरकरार रखी है।

वही ईडब्ल्यूएस में भी वर्तमान क्राइटेरिया बरकरार रखा गया है ताकि इस सत्र के लिए एडमिशंस में परेशानी न आए।

अदालत ने कहा कि,"वह पांडेय समिति की सिफारिशों को अगले साल से लागू करने को मंजूरी देती है। बेंच ने मार्च के तीसरे हफ्ते में याचिका पर अंतिम सुनवाई करने का फैसला किया।

तब पांडेय समिति की ओर से द‍िए गए ईडब्ल्यूएस क्राइ‍टेरिया की वैधता तय की जाएगी"।

6 जनवरी को अदालत ने मामले में पक्षों को सुनने के बाद गुरुवार को फैसला सुनाने का निर्णय लिया था।

बताया जा रहा है कि याचिकाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण और साथ ही स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए,

अखिल भारतीय कोटा सीटों में (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती दी गई थी।

बता दे की नीट के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों में से एमबीबीएस में 15 प्रतिशत सीटें और एमएस और एमडी पाठ्यक्रमों में 50 प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय कोटा के माध्यम से भरी जाती हैं।

वहीं फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि "काउंसलिंग की प्रक्रिया जल्‍द शुरू होनी चाहिए. यह राष्‍ट्रहित में है क्‍योंकि देश में फिलहाल रेजिडेंट डॉक्‍टर्स की भारी कमी है."

इसी के साथ ही अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कोटे का विरोध किया है।उन्होंने ईडब्ल्यूएस कैटिगरी के लिए 8 लाख रुपये के क्राइटेरिया का विरोध किया

और कहा कि वैकल्पिक तौर पर 2.5 लाख की लिमिट तय की जा सकती है।

महिमा शर्मा